जीवन

हंसता खेलता जीवन, था जब बचपन।

मनमर्जी करते थे, सारे मिलकर हम।

जब से हुए बड़े, खुद की बातें करते कम।

काश लौट के आ जाए फिर वही बचपन।

लेकिन गुजरा वक्त लौटकर आता नहीं कभी

फिर क्यों ?करें हम गम…

जेसे भी रहे हर हाल में खुश रहे, क्योंकि यही है जीवन।