सत्य कथन है ये सारा” जिंदगी ना मिलेगी दोबारा”।
स्टे सेफ- स्टे होम का लग रहा है चारों और नारा।
वीरान हो गया सारा जहां सन्नाटा भी चीख-चीख के है हारा।
प्रकृति पर जो ढाया कहर,अब वह तांडव कर रही हर गली, गांव और शहर।
कितनी सांसे ,जीवन और मृत्यु के बीच है झूल रही।
कितनों की अंतरात्मा बिलखती – बिलबिलाती भूख से हैं दाने- दाने को तरस रही।
डॉक्टर, नर्स ,पुलिस ,प्रहरी सबका जीवन है परवान चढ़ा।
हृदय नयन हो रहा हैं घायल, देख – देख कर ये बेबस नजारा।
हर कठीन और सरल वक्त गुजर जाता है, यह वक्त भी गुजर जाएगा।
समय के साथ इस प्रलय का भी अंत , निश्चित ही हो जाएगा।
खिलवाड़ सृष्टि से करने की सजा भोग रहा है हर मानव,
रामायण ,महाभारत की तरह भूतकाल में शामिल लेकिन यह वृत्तांत सुना जाएगा।
धर्म के नाम पर जो लगता था, अलग-अलग धर्मों का नारा।
सब एक से लगने लगे है मंदिर , मस्जिद, गिरजाघर हो चाहे गुरुद्वारा।
अगर कोरोना को है हराना, तो घर के अंदर ही मन लगाना ।
देगा ना फिर कोई सहारा, अपने भी कर लेंगे किनारा।
सब्र रख ले घर के अंदर ही मानव ,क्योंकि” जिंदगी ना मिलेगी दोबारा”।
🙏मनीषा मारू🙏
🙏 नेपाल🙏
