“जिंदगी ना मिलेगी दोबारा”


सत्य कथन है ये सारा” जिंदगी ना मिलेगी दोबारा”।
स्टे सेफ- स्टे होम का लग रहा है चारों और नारा।
वीरान हो गया सारा जहां सन्नाटा भी चीख-चीख के है हारा।
प्रकृति पर जो ढाया कहर,अब वह तांडव कर रही हर गली, गांव और शहर।
कितनी सांसे ,जीवन और मृत्यु के बीच है झूल रही।
कितनों की अंतरात्मा बिलखती – बिलबिलाती भूख से हैं दाने- दाने को तरस रही।
डॉक्टर, नर्स ,पुलिस ,प्रहरी सबका जीवन है परवान चढ़ा।
हृदय नयन हो रहा हैं घायल, देख – देख कर ये बेबस नजारा।
हर कठीन और सरल वक्त गुजर जाता है, यह वक्त भी गुजर जाएगा।
समय के साथ इस प्रलय का भी अंत , निश्चित ही हो जाएगा।
खिलवाड़ सृष्टि से करने की सजा भोग रहा है हर मानव,
रामायण ,महाभारत की तरह भूतकाल में शामिल लेकिन यह वृत्तांत सुना जाएगा।
धर्म के नाम पर जो लगता था, अलग-अलग धर्मों का नारा।
सब एक से लगने लगे है मंदिर , मस्जिद, गिरजाघर हो चाहे गुरुद्वारा।
अगर कोरोना को है हराना, तो घर के अंदर ही मन लगाना ।
देगा ना फिर कोई सहारा, अपने भी कर लेंगे किनारा।
सब्र रख ले घर के अंदर ही मानव ,क्योंकि” जिंदगी ना मिलेगी दोबारा”।

🙏मनीषा मारू🙏
🙏 नेपाल🙏

नया साल का हो सुंदर आगमन विक्रम संवत् २०७८

नया साल का हो सुंदर आगमन,
आओ मिलकर यही प्रार्थना करे हम।


ये दिल तो चाहता सबका सदैव नयापन,
लेकिन हरी भरी प्रकृति से ही केवल
सुरक्षित है हमारा ये जीवन,
तो अब ना हिस्से आए, किसी के जीवन में,
अंधेरी गुमनाम सुरंग।

नया साल का हो सुंदर आगमन,
आओ मिलकर यही प्रार्थना करे हम।

बाते ज्यदा हो या मुलाकातें कम,
अहसासों की पोटली खोलू तो,
यादें होती ही नहीं कभी ख़तम।

नया साल का हो सुंदर आगमन,
आओ मिलकर यही प्रार्थना करे हम।

बीता हुआ साल कितनों को,
हृदय के करीब ले आया,
तो कितनों की जिंदगी में दे गया, 
कभी ना मिटने वाला जहरीला गम।

नया साल का हो सुंदर आगमन,
आओ यही प्रार्थना करे, एक दूजे के लिए हम।

क्या खोया क्या पाया,
ये सोच सोच करे ना हम वक्त जाया,
ना ज्यादा ना कम,
जितनी सांसे बस उतना ही सबका जीवन,
तो क्यों ना करे,
नित्य नए हौसलों का हम Welcome,

नया साल का हो सुंदर आगमन,
आओ मिलकर यही प्रार्थना करें हम।

गमों के सैलाबों में भी,
मुस्कुराहटों का जुनून भर दे हम।
नफरतों की दीवारों में प्यार का रंग चढ़ाए,


गमों के पूराने इटे,
अगर बिखरे गए हो कहीं,
इधर उधर तो क्यों ना उन्हें भी इक्कठा कर,
खुशियों की सीमेंट से  जोड़ा जाए।


बस इन्हीं  ढेर सारी शुभकामनाओ के साथ,
सभी के लिए करता, मेरा ये मन आज वंदन।

नया साल का हो सुंदर आगमन
आओ मिलकर यही प्रार्थना करे, इस धरा के लिए
और एक दूजें के लिए हम।

मनीषा मारू
नेपाल

मन का बादशाह

मेरे खामोशी के अल्फाजों मैं,
सिर्फ और सिर्फ होता जिक्र तेरा।
रूह ऐ फलक पर,
एहसासों का रंगीन जामा पहन
बन ही गया तू,
इस तड़पते मन का बादशाह भी मेरा।
इश्क की दीवारों को नेह प्रेम से सींच,
लिखकर मांगती भी हूं,
अर्श से फर्श तक सिर्फ तेरी सलामती की ही दुआ।
आजाद कर मेरे गमों के अंधोरो को, और भर दें जीवन में खुशियों की झोली
बनकर वफाओं का खूबसूरत सा फरिश्ता।

वरना ताउम्र
तेरे एक पल के दीदार को हरपल रहेगा ये मनवा तरशता।

मनीषा मारू
नेपाल

वक्त का दौड़

बीती यादों की आंधियों में
कभी खुशियों की चाशनी होती सराबोर।
तो कभी नैनो के कौर डूब जाते
गमों की नमी से चाहु ओर।
हर कदम हर लम्हा बस आगे ही बढ़ता रहता
कभी थमता ही नही ये वक्त का दौड़।
फिर भी हर राह गुजर ही जाती हैं जीवन में
चाहें जैसें भी आए उतार चढ़ाव के  मोड़।