Momspresso Check out this interesting video “तू छोड़कर पल पल का रोना…..सुनिए मेरी स्वरिचत कविता” by Manisha Maru. Watch Here: https://www.momspresso.com/parenting/c02332ff992742fc8d0d5804ac72d1f5/video/tuu-choddkr-pl-pl-kaa-ronaa-congratulation-momspresso-cheers-10-years-best-wishes-4ever-iadguk2f89vx?utm_source=VD_Generic_Share&utm_medium=Share_Android

“जीवन”

जीवन से जुड़े, हर रिश्ते रंग भरते हैं,
कभी इन रिश्तों से मिलती है खुशी,
तो कभी आंखो में नमी।
फिर भी यह सारे रिश्ते, बेजोड़ कहलाते हैं ।
जिनके एहसास जीवन भर भी ना मिट पाते हैं ।
जैसे कली रहती है, कांटो के बीच
दर्द में भी अपने जीवन को सीच।
ना घबराती है, तूफानों के थपेड़ों से।
आंधी ,धूप, बारिश कितनी भी पड़ जाए उसपे।

जीवन सार्थक समझती है अपना,
जब हर मौसम को झेल,
फूल बन अर्पण हो जाती है

प्रभु चरणों में। हमारे जीवन का लक्ष्य भी हो वही,
। हार के बाद भी हम, जीवन में हारे नहीं।

पितरों को समर्पित

  है “पितृ देवता” ,आप के बाद भी
हर घड़ी हम ने,
आप के साथ ही गुज़ारी है ।
नमन- वंदन है, हर कदम आपको।
पुरखो में शामिल होकर भी,
हर पथ -हर पल पर्चा दिया सबको भारी है।
भुला नहीं सकते ,हम आपको
हर दिन दीप प्रज्वलित होता आपके नाम का
यह जीवन तो आपका ही,
ऋणी हैं ,आभारी हैं।

काश

काश कि ना समझी मे ही, बीत जाता सारा जीवन
भीगता रहता बारिश की हर बूंदों से, फिर आज भी ये अंतर्मन।
छतरी चाहे खुली हो या बंद,
नजरें चाहती वही ,पहली रिमझिम फुहारों वाला आनंद।
लेकिन अब घनघोर घटाएं जब भी छाए,
यूं लगता है जैसे आनंद और टीस,
दोनों संग संग लेकर आए ,
और खुले नयनों के रास्ते होकर हौले से बह जाए।

नेपाल ,भारत मैत्री

“जय हिंद”


कितनी बड़ी है धरती मां हमारी ,
और कितनी छोटे हैं हम।
फिर क्यों ना हम ऐसा बीज बोए ,
नाम ले भारत का और नेपाल हर्षित होए।
भारत के चमन में भी हम ऐसे फूल खिलाए
फूल खिले हो वहां, और खुशबू
हमारे गुलशन तक आ जाए।
हर क्षेत्र में आगे हैं ,हमारा भारत देश ,
फिर भी देखो क्यों तन-मन-धन लगाकर
भटक रहे हम भी विदेश।
हृदय खोल, हाथ जोड़, अगर करें हम एक दूसरे का सम्मान,
तभी बन सकेगा भारत और नेपाल एक दूसरे का अभिमान।
तीन दिशाओं से हैं हम आपस में जुड़े,
फिर बनके ताकतवर क्यों ना हम एक दूसरे की रक्षा करें।
मानो जैसे कोई द्वारपाल की तरह ,आपस में बातें कर रहै हो होकर खड़े।
मिलते जुलते हैं हिंदू राष्ट्र हमारे, धर्म स्थानों की हैं दोनों ही देशों में भरमार।
चाहे हो वो “तिरुपति बालाजी” हो चाहै “पशुपतिनाथ”
फिर क्यों ? बढ़ाकर जाती भेदभाव खुद को ही  तोड़ रहे हैं !
और कर रहे हैं आपस में संबंध विच्छेद।?
बनाए हम भारत और नेपाल के इतने मजबूत संबंध–
कि रिश्तो की भाषा में कहा जाता है, जैसे जनम -जनम का है यह बंधन।
दोनों ही हो अगर देश के लिए कुर्बान “मां ममता को” और “जान को जवान”
तभी हम कह सकते हैं “मेरा भारत महान”और हम “नेपाल वासियों” को को प्यारा है “हिंदुस्तान”।
बना रहे दोनों ही देशों के बीच ,आपसी प्यार और उदगार
फिर तो “नेपाल -भारत मैत्री  “की मेरी यह कविता बन जाए आने वाले हर सालों के लिए यादगार।

मां बेटी की दोस्ती।

जीवन में जब ,बेटी यौवन की दहलीज पर खड़ी होती है, तो उसकी पहली दोस्त उसकी मां होती है। मां से अटूट प्यार वाला रिश्ता तो होता ही है, साथ ही दुनिया की वो सबसे पहली और अच्छी दोस्त होती है, जो परछाई जैसे  सदा हमारे साथ रहती है। वह हमारी सखा,साथी, आलोचक सब कुछ होती है। जब भी हम टेंशन में या  विपरीत परिस्थिति में होते हैं ,तो मां उन खुली खिड़कियों की तरह होती है, जो जीवन में फिर से ताजी हवा हमारे भीतर भर एक नया मार्ग दिखाती है। मां ही पहला प्यार और दोस्ती कहलाती है।

दिमाग रूपी कोरॉना कब जाएगा?

कोरॉना क़ाल बन गया जी का जंजाल।
उथल-पुथल हो गई, 4 महीनों से जिंदगी।
हर सिक्के के दो पहलू होते हैं—
कोरॉना ने भी यही सीखाया।
कितने हो गए घर से बेघर,
कितनों ने भूखे पेट जान गवाई।
कितनों की विरह वेदना से,
हृदय नैन हुआ घायल,पर
हम देख कर भी कुछ ना कर पाए।
पुलिस, प्रहरी, नर्स ,डॉक्टर,
सबका जीवन हैं परवान चढ़ा।
पर इनके लिए,
किसी का ना हाथ आगे बढ़ा।
महाभारत, रामायण सब ने फिर से देखा,
हाथ जोड़ना सीख मृत संस्कार भी जिंदे हुए।
2 गज की दूरी बढ़ी,
हाथों पर सेनीटाइजर बार-बार लगा,
मुंह पर बंद गई सबकी पट्टी।
लेकिन जिनके दिमाग में ही बैठ गया कोरॉना,
वह कब जाएगा ,
जिन्होंने आपनो से बना ली मन में दूरियां,
और बांध ली आंखों पर पट्टी।
इसका मलाल ही जीवन भर रह जाएगा।
🙏 मनीषा मारु 🙏

" नारी की पुकार"

मन में विश्वास है
हे नारी तू महान है
मां, बहन, बेटी,
पत्नी के रूप में हो तुम सजती ।
तो देवी बन मां सरस्वती ,लक्ष्मी ,
दुर्गा और काली के रूप में ,
सर्वत्र पुजी जाती ।
हे नारी तू महान है….
बेटी बन मां-बाप का मान रखती,
तो बहु बन सास – ससुर का सम्मान करती ।
मां बन बच्चों को शिक्षा देती ,
तो पत्नी बन सुख – दुःख की सहभागीनी बनती ।
हे नारी तू महान है..
घर का कर्तव्य निभा कर भी,
तुम चुप हो रहती।
तो बच्चों की किलकारी से,
तुम हरपल  खुश रहती ।
घर -परिवार की डांट ,
भी तू हंस कर सह लेती।
तो अपने परिवार की खुशी के लिए
अपने सारे सपनों को कुर्बान करती।
तूफानों से टकराकर ,
सबपे हो तुम प्यार लुटाती।
है नारी इसलिए तू महान कहलाती।