गुरुजनों को समर्पित
गुरुर्ब्रह्मा गुरुर्विष्णु र्गुरुर्देवो महेश्वरः
गुरु साक्षात परब्रह्मा तस्मै श्रीगुरवे नमः
माटी रख कर चाक पर, घड़ा घड़े कुम्हार!
श्रेष्ठ गुरु मिल जाय तो, शिष्य पाय संस्कार!!
धरती कहती, अंबर कहता ,कहता है जन -जन
का यह विचार।
गुरु बिन मिलता नहीं,
हमारे विचारों को नव आकार।
गुरु की डांट में भी ,छुपा होता है प्यार ।
वो ही तो भरते हमारे अंदर ,ज्ञान का भंडार।
जैसे शिल्पकार ,छेनी से गढ़ता
पत्थर पर मनचाहा आकार।
वैसे ही गुरु आत्मविश्वास जगा कर,
करवाते हमसे ,हमारे ही सपनों को साकार।
सभी छोटे-बड़े ,भाई- बंधु ,सखा- मित्र,
और चित -परिचित को है मेरा नमन
सभी से मिलता हामें ,कुछ न कुछ जीवन में ज्ञान
बच्चो के प्यार आगे,
भी नतमस्तक हो जाती हूं मैं कई बार।
डांट रोष खाकर पर भी, लुटाते अपना स्नेह- दुलार।
लेकिन सर्वप्रथम कर जोड़ करती हूं ,
मेरे प्रथम गुरूमाता-पिता को प्रणाम।
क्योंकि उनसे ही मिला हैं,मुझे ये जीवन- प्राण
धन्यवाद्
मनीषा मारू
नारी सशक्तिकरण

नारी सशक्तिकरण अर्थात आपरी निजी स्वतंत्रता, अगर नारी न आपर जीवन से जुड़े रा हर एक फैसला करने रो अधिकार ही नारी सशक्तिकरण कहलावा है।
नारी ही शक्ति हूंव है नर री,नारी ही श्रृंगार हुव हर घर री
आपर परिवार की खुशियां ताई , खुद र सुपना कुर्बान कर है नारी। फेरू भी ओहि सवाल उठ जावे है हरदम क्यों , कई थारो अस्तित्व है नारी।
केवल एक दिन नारी दिवस मना कर या समाज म जगह-जगह नारी शिक्षा नारी जागृति और नारी सशक्तिकरण रो भाषण देर केवल नारी सशक्त कोनी हो सका है।
समाज में नारी सशक्तिकरण जब ही आ सका है जद आपा सारी राक्षसी सोच यानी दहेज प्रथा, यौन हिंसा, भ्रूण हत्या ,असमानता ,आशिक्षा ,नारी के प्रति घरेलू हिंसा, कार्यस्थल पर यौन शोषण , इत्यादि न मानसिक रूप सू जलाकर भस्म कर देवा।
नारी है त है जग सारो ,नारी ने ही विश्व सवारों
जे मिल नारी न धरती पर सम्मान तो खुद ही तलाश लेंवगी बा आप रो आसमान।
लेकिन पंख दिया पर काट दिया, हक दिया पर बांट दिया
आपर आत्माविश्वास रूपी पंखा न दृढ़ संकल्प सु लहरा कर ही केवल नारी नभ री ऊंचाई न छू सका है।
और जो नारी कमजोर बन जाव बा केवल रूढ़िवादिता री जंजीर सु जकड़ी घर का एक दायरा तक ही सीमित रेह जावा है।
अपनी देवी देविया भी शक्ति ने दर्शाया है।
आंखों में प्यार ,होठों पर मुस्कान लेकिन हाथ में हथियार सजाव है।
नारी हर एक क्षेत्र में आप रो कौशल दिखार आग बढ़ चुकी है। चाहे व्यापार हो या खेल र मैदान , शिक्षा हो चाहे राजनीतिक स्थान , परिवार हो जाए अंतरिक्ष री उड़ान। फरू भी हर कदम पर बिन हर रोज रोंदो जाव है बीक प्रति दृष्टि तो केवल रमणी और जननी तक ही समाज में हुआ है।
तो बेबस बनकर क्यो जीनू है तना, जद लोक लाज थारो गालों घोटियो और राष्ट्रीय धृतराष्ट्र बन बैठयो है।
हर वक्त परिस्थितियों भी दोषी कोनी हूंव
अगर नारी खुद न सशक्त कर विपरीत परिस्थिति न भी चुनौती समझ सामनो करना सीख जाव तो वे विपरीत परिस्थितियां भी एक सुनहरा अवसर बन मंजिल तक पहुंचा दे।
ईबास्त बचपन सु ही अगर नारी म आत्मरक्षा ,
आत्मसम्मान ,आत्मबल रो बीज बो दियो जाव ह तो भविष्य में जीवन सू जुड़ेडा हर एक फैसला निडर होर खुद ही समय 2 पर लेनो सीख जाव है।
कानूनी आरक्षण तो एक मात्र वैशाखी सो ही सहारो बनपायो ह ।नारी स्वतंत्रता के नाम पर केवल नारी स्वच्छंदता रो हि दर्जा नारी ना केवल मिल पाया है। आज तक कोई भी कानून और व्यवहार लिंगभेद दूर कोनी कर पायो हो ।
हर जगह किसी ना किसी रूप में समाज म यो सवाल उठ ही जाव हैं कि नारी रो स्थान या अधिकार क्यो और कितनों है ?
हर काम सरकार कोनी कर सक है और सब जगह सरकार पहुंच भी कोनी सक है इ वस्ता नारी री सुविधा और सुरक्षा जुटता रहवन ताई पुरुषवादी समाज ही मान्यता मिलती चली गई। कुछ तो अपनी सोच परिवर्तन करनी परसी और सफलता पानी है तो अपरा अधिकार और हक ताई हरएक नारी न अपरी भीतर छिपी दबी आवाज और शक्ति न बार निकालनो ही पारसी
एक बहुत बड़ी रुकावट है नारी सशक्तिकरण री अपना समाज म की एक नारी ही कहलाव नारी री सबसु बड़ी दुश्मन । हर जगह नारी ही एक नारी ने पुरुषरा आग भीतर ही भीतर झुकना और दबंनो सिखावा है। केवान ताई बेटा बेटी समान है लेकिन बेटा रि चाहना सु आज भी भ्रूण हत्या हुआ बार-बार है। और दहेज रे आग आज भी एक बाप लगा देव दांव पर आपरो सारो घर संसार। क्यों आज भी लाड प्यार सु पलने वाली बेटी, ब्याव रा बाद आप र विचार री स्वतंत्रता खो देवा है। जद बा अच्छाइयां और कमियां र सगा परिवार र सारा सदस्य ने अपना लेव ह तो । हर सदस्य मिलकर बिरी अच्छाइयां सागा कमियां न क्यों कोनी अपना सका ह। बहु री बुराइयां तो जिया कोई गुनह ही बन जावा है।क्यों कोनी बिकी गलतियां एक बेटी जिया ही नजरअंदाज कर दी जाव । जी दिन बहू री गलतियां न बेटि जिया प्यार सु सुधरी जावेगी , समझवी जावेगी ,बीक दर्द सु घर क सदस्य न तकलीफ हुअगी और एक बहु भी बेटी सु प्यार और सम्मान परिवार न देवगी तो ही संभव हो पवगो पुरुष प्रधान समाज में नारी रो सम्मान। आपरा बुलंद हौसला और परिवार र साथ सु ही हर नारी आगे बढ़ निखर पाव है ।परिवार रो साथ ही सबसु बड़ी ताकत भी हूंव है जठ जीवन की लाराई हारकर भी बेक साथ सु जीत ही महसूस हुआ है।
नहीं जाना घर री बहु हो चाहे बेटी खराब तो एक नारी ही काहलाव है। जी दिन जलन और द्वेष री भावना त्याग , देवगी एक नारी दुजी नारी रो साथ तो निश्चीत ही संभव हो जासी समाज म नारी सशक्तिकरण र विकास ।
अगर एक नर शिक्षित हुआ तो केवल बीको भविष्य ही विकसित हुआ है, लेकिन अगर एक नारी शिक्षित हुआ है तो पूरो कुटंब समाज राष्ट्रीय ही नहीं पूरो देश भी विकसित हुआ है।
अगर आप एक पुरुष हो तो करी जो नारी री सम्मान और अगर आप एक स्त्री हो तो करी जो बिम सु एक होने रो अभिमान। धन्यवाद
Manisha Maru.

“समाज री बुराइयां व निवारण रा उपाय” मेरी एक छोटी सी लेखनी माय।
“आपा बेशक समाज रो हिस्सों हा,
लेकिन समाज तो आपा सु ही है।
अगर बुराइयां विनाश रो रूप ले रही है,
तो निवारण भी आपन हाथ में ही है।”
समाज जी तेज रफ्तार सु परिवर्तनशील हो रियों हैं, दिन प्रतिदिन समस्या विकराल रूप धारण कर रही हैं। लगातार बढ़ती जनसंख्या, महंगाई, गरीबी र कारण भुखमरी समाज में जहर जिया फैल रही है।
आए दिन तलाक, लुप्त होवता आपना संस्कृति और संस्कार,ब्याव सु पहला मिलनो- जुलनो,इंटरनेट को गलत इस्तेमाल करनों,एकल परिवार,बाल श्रम,
नशाखोरी ,दहेज प्रथा, भ्रूण हत्या, पश्चिमी सभ्यता सु बदलतो खान -पान ,रहन -सहन इतनो ही नहीं
दिखावा र लार मच रही होड़ा – होड़ी सु छोटो
स छोटा कार्यक्रम न भी बड़ों और भव्य आयोजन रो रूप दे दियो जाव है ।
सबसे पहला तो आपा न अपनों ही विचार बदलनो परसी जद ही आपा समाज, राष्ट्र और देश न बदल नुवो रूप दे सका हैं। बचपन सु ही आपा बेटा न संस्कार रो ज्ञान देवा और नारी रो घर म ही नहीं बारा भी सम्मान करना सिखावा। बेटियां न भी संस्कार र साथा आत्मरक्षा और आत्मसम्मान रो ज्ञान दें शिक्षित करावा।
जाति और धर्म की आड़ में भी समाज रो बटवारो होरीयो हैं । बिन भी आपसी भाईचारा और प्यार सु हटावा और समाज न सुदृढ़ बनावा। रूढ़िवादिता और अंधविश्वास के कारण समाज आगे बढ़कर भी पिछरेड़ों हैं। इके लिए समय-समय पर जगह-जगह जागरूकता को प्रचार प्रसार करवनों जरूरी है ताकि समाज र हर एक व्यक्ति मानसिक रूप स कुरीतियां र खिलाफ होर जागरूक बनजाव।
आज की युवा पीढ़ी के लिए , सबसे ज्यादा जरूरी है नशा मुक्ति अभियान शुरू कर जागरूक करावानों ।जद ही समाजिक और आर्थिक दोनों ही क्षेत्र में आपा विकसित हो सक है ।
नारी उत्थान र खातिर भी जगह-जगह शिक्षा व्यवस्था कराई जाव ताकि भविष्य में कर्तव्य और अधिकार न समझ नारी स्वयं सही निर्णय ले सकें। एक “नर” अगर शिक्षित हुव तो स्वयं ही विकसित हुव हैं। लेकिन एक “नारी “अगर शिक्षित हुव तो सरो कुटुंब ,परिवार, समाज, राष्ट्र ही नहीं देश भी विकसित हुव हैं।
एक छोटो स उदाहरण- “आपा कदाई कोनी चावा आपना टाबर आपर घर माही चोरी करें या अपना नौकर धोखा देवें और घर परिवार के सदस्य गैर जिम्मेवार हुव ,चौकीदार पेहरो देना री जगह सोजावा, सब्जी वालों कम सब्जी तोल।जद आपा छोटी-छोटी बातों रो ध्यान रख सबसु इमानदारी चावा तो फेरू समाज किया बिना इमानदारी सु आगे बढ़ सक है।
समाज न आपा सु वही उम्मीद हुव है, जो कि एक माता- पिता न अपरी सन्तान सु और एक गुरु न अपरा शिष्य सु और एक सेनापति न अपरी सेना सु होव है।
समाज र वातावरण म पलने वालो नन्हो बालक (देश के भविष्य )न सुरु से ही शिक्षा दी जावे जद ही वो बढ़ो होर एक अच्छा नागरिक बन , समाज रूपी वटबृक्ष को संरक्षण कर , फलने फूलने म सहभागी बन शक है।नारी सु भी एक नारी रो उत्थान में महत्वपूर्ण उत्तरदायित्व हुव है।
अन्तत: इतना ही कहना चाहूं चंद शब्द री लिखने में समाज आपाऊ वो सारी उम्मीद रख जो आपा अपना परिवार सु रखा हा । हमेशा मायड़ भाषा रो उपयोग करा , सामने वालों शुरुआत नहीं करें, तो आप आ ही पहल कर अपनी भाषा न निरंतर आगे बढ़ाने रो प्रयास करा।
मनीषा मारू
“सुहानी हवा”
ऐ लहराती हुई -सुहानी हवा,
तू ही कुछ बता।
क्या राज है तुझमे छुपा,
सुबह-सुबह उठकर
आ जाती हूं छत में सदा।
एक दिन भी
ऐसा गुजरता नहीं,
की ना लू में
कोयल की कूह कूह
चहेकती चिड़िया की गूंज
और पेड़ – पौधों की
सरसराहट का मज़ा।
छूकर जब भी तुम मेरे
पास से होकर गुजरती हो
लगता है जैसे पा रही मैं
तब मीठी-मीठी
खुशियों भरे एहसासों की सजा।
ऐ मेरी लहराती सुहानी हवा
अब तू ही कुछ बता…क्या राज हैं तुझमें छुपा।
मनीषा मारू
नेपाल
कुछ करके निखर जाऊं।
घुटन से रो रो के मर जाऊं, या कुछ करने कि ठान जिंदगी में आगे बढ़ जाऊं।
जीवन में सबके आती है मुश्किलें, तो मै भी क्यों ना कुछ करके निखर जाऊं।
बाधा बन जाते हैं जीवन मैं जो लोग, क्यों ना उन्हें भी कुछ करके दिखाऊं।
किसी के लिए क्यों रात दिन मैं अब आंसु बहाऊ, जब उन्हें मेरी कद्र ही नहीं।
हर परिस्थितियों को चुनौतियों बना, क्यों ना मै अब खुद को चमकाऊ।
घुटन से रो रो के मर जाऊं, या कुछ करने कि ठान जिंदगी में आगे बढ़ जाऊं।
मां मेरी जान पिता मेरे भगवान

जब भी लिखना चाह कलम से, मां पापा का नाम।
कह उठी कलम अदब से, हो गए तेरे चारों धाम।
खुशहाली

बहुत सारी बातें, जो जीवन में खुशहाली लाती।
आनंद, उत्साह हृदय के अन्दर है फिर बढाती।
जैसे कोई नया कवर मै अपने जीवन में हूं चढ़ाती।
दिल की धड़कन भी है फिर हलचल मचाती ।
मत पूछ कैसे बताऊं तुम्हें मेरे साथी।
जीवन अधूरा लगता है , तुम्हारे बिन जैसे दिया बिना बाती।
