कुछ तो लगा मन को
तभी टूटने लगा
एक कोने से रोने लगा
आंसू ना दिखा सकू
क्या हुआ किसी को
बता ना सकू
छुपाऊं तो घुटन में जीऊ
और अंतर्मन का टूटने से
खुद को भी ना बचा सकूं
कुछ तो लगा मन को
तभी टूटने लगा
एक कोने से रोने लगा
आंसू ना दिखा सकू
क्या हुआ किसी को
बता ना सकू
छुपाऊं तो घुटन में जीऊ
और अंतर्मन का टूटने से
खुद को भी ना बचा सकूं
हवाओं ने रुख बदली, सितारों ने चाल बदली।
मगर ध्रुव तो अटल रहता हैं अंबर पे सदा।
समुंद्र ने किनारे बदले, तूफानों ने लहरें बदली।
मगर जल तो जीवन- प्राण रहता हैं सदा।
पतझड़ ने मौसम को बदला ,नकाब ने चेहरों को बदला।
मगर बहारों में फूल खिलते हैं सदा।
धुन ने संगीत को बदला, ताल ने नृत्य को बदला।
मगर राग तो साज करती हैं अधरों पे सदा।
भावनाओं ने विश्वास को बदला, लोभ ने इंसान को बदला।
मगर हृदय नैन तो कराते है आत्म- दर्पण सदा।
हादसों ने जीवन को बदला, अखबारों ने खबरों को बदला।
मगर मुश्किलों में हौसला ही काम आता हैं सदा।
समय ने सूत्रों को बदला, दर्पण ने सौंदर्य को बदला
मगर धरा के श्रृंगार से ही मानव सजता है सदा।
शंखनाद की गूंज बदली, घंटियों की ध्वनि बदली।
मगर ध्वजा तो मंदिरों पे लहराती है सदा।
मनीषा मारू

मत करो किसी से अपेक्षा
आगे बढ़ते चले जाओ अकेले ही।
खुद ही कर्मठ बनो,
हौसला ना हरो हारकर भी।
उतार चढाव हैं जिंदगी,
रात अंधेरी तो फिर होगा सुनहरा सबेरा भी।
अडिग रहो अपने पथ पर
तो निश्चित पा ही लोगे अपना लक्षय भी।
तुम अच्छे लगने लगे,
कुछ खास तो तुममें जरूर था।
होने लगे हम तो बस तुम्हारे,
क्योंकी तुम्हारे जज्बातों में ही नुर था।
घर के हालात जब बिगड़ जाते हैं।
आते-जाते लोग मजा उड़ा जाते हैं।
अपने घर के हालातों को,
ना बेनकाब करो दुनिया के आगे।
उतार-चढ़ाव तो जीवन है,
एक दूसरे का हाथ थामे रहो सोए रहो चाहे जागे।

फूलों को देख मैं भी खिल जाती हूं।
कांटो कि चुभन भी भूल जाते हूं।