नारी सशक्तिकरण

Short article

नारी सशक्तिकरण अर्थात आपरी निजी स्वतंत्रता, अगर  नारी न आपर जीवन से जुड़े रा हर एक फैसला करने रो  अधिकार  ही नारी सशक्तिकरण  कहलावा है।
नारी ही शक्ति हूंव है नर री,नारी ही श्रृंगार हुव हर घर री
आपर  परिवार की खुशियां ताई , खुद  र सुपना कुर्बान कर है नारी। फेरू भी ओहि सवाल उठ जावे है  हरदम क्यों , कई थारो अस्तित्व है नारी।
केवल एक दिन नारी दिवस मना कर या समाज म जगह-जगह नारी शिक्षा नारी जागृति और नारी सशक्तिकरण रो भाषण देर केवल नारी सशक्त कोनी  हो सका है।
समाज में नारी सशक्तिकरण जब ही आ सका है जद आपा  सारी राक्षसी सोच यानी दहेज प्रथा, यौन हिंसा, भ्रूण हत्या ,असमानता ,आशिक्षा ,नारी के प्रति घरेलू हिंसा, कार्यस्थल पर यौन शोषण , इत्यादि न मानसिक रूप सू जलाकर भस्म कर देवा।
नारी है त है जग सारो ,नारी ने ही विश्व सवारों
जे मिल नारी न धरती पर सम्मान तो खुद ही तलाश लेंवगी बा आप रो आसमान।
लेकिन पंख दिया पर काट दिया, हक दिया पर बांट दिया
आपर  आत्माविश्वास रूपी पंखा न दृढ़ संकल्प सु लहरा कर ही केवल नारी नभ री ऊंचाई न छू सका है।
और जो नारी कमजोर बन   जाव बा केवल रूढ़िवादिता  री जंजीर सु जकड़ी घर का एक दायरा तक ही सीमित रेह जावा है।
अपनी  देवी देविया भी  शक्ति ने दर्शाया है।
आंखों में प्यार ,होठों पर मुस्कान लेकिन हाथ में हथियार सजाव है।
नारी हर एक क्षेत्र में आप रो कौशल दिखार आग बढ़ चुकी है। चाहे व्यापार हो या खेल र मैदान , शिक्षा हो चाहे राजनीतिक स्थान , परिवार हो जाए अंतरिक्ष री उड़ान। फरू भी हर कदम पर बिन हर रोज रोंदो जाव है बीक प्रति दृष्टि तो केवल रमणी और जननी तक ही समाज में हुआ है।
तो  बेबस बनकर क्यो जीनू है तना, जद लोक लाज थारो गालों घोटियो और राष्ट्रीय धृतराष्ट्र बन बैठयो है।
हर वक्त  परिस्थितियों भी दोषी कोनी  हूंव
अगर नारी खुद न सशक्त कर  विपरीत परिस्थिति न भी चुनौती समझ  सामनो करना सीख जाव तो वे विपरीत परिस्थितियां   भी एक सुनहरा अवसर बन  मंजिल तक पहुंचा दे।
ईबास्त बचपन सु ही  अगर  नारी म आत्मरक्षा ,
आत्मसम्मान ,आत्मबल रो बीज बो दियो जाव ह तो भविष्य में जीवन सू जुड़ेडा हर एक फैसला निडर होर खुद ही समय 2 पर लेनो सीख जाव है।
कानूनी आरक्षण तो एक मात्र वैशाखी सो  ही सहारो  बनपायो  ह ।नारी स्वतंत्रता के नाम पर केवल नारी स्वच्छंदता रो हि दर्जा नारी ना केवल मिल पाया है। आज तक कोई भी कानून और व्यवहार लिंगभेद दूर कोनी कर पायो हो ।
हर जगह  किसी ना किसी रूप में समाज म यो सवाल उठ ही जाव हैं कि  नारी रो स्थान या अधिकार क्यो और कितनों है ?
हर काम सरकार कोनी  कर सक है और सब जगह सरकार पहुंच भी कोनी सक है इ वस्ता नारी री सुविधा और सुरक्षा जुटता रहवन ताई  पुरुषवादी समाज ही मान्यता मिलती चली गई। कुछ तो  अपनी सोच परिवर्तन करनी परसी और सफलता पानी है तो अपरा अधिकार  और हक ताई हरएक नारी न अपरी भीतर छिपी दबी आवाज और  शक्ति न बार निकालनो ही पारसी
एक बहुत  बड़ी रुकावट है नारी सशक्तिकरण री अपना समाज म की एक नारी ही  कहलाव नारी  री  सबसु बड़ी दुश्मन । हर जगह नारी ही एक नारी ने पुरुषरा आग भीतर ही भीतर झुकना और दबंनो सिखावा है। केवान ताई बेटा बेटी समान है लेकिन बेटा रि चाहना सु आज भी भ्रूण हत्या हुआ  बार-बार है। और दहेज रे आग आज भी एक बाप लगा देव दांव पर  आपरो  सारो घर संसार। क्यों आज भी  लाड प्यार सु पलने वाली बेटी, ब्याव रा बाद आप र विचार री स्वतंत्रता खो देवा है। जद बा अच्छाइयां और कमियां र सगा परिवार र सारा सदस्य ने अपना लेव ह तो । हर सदस्य मिलकर बिरी अच्छाइयां सागा कमियां न क्यों कोनी अपना सका ह। बहु री बुराइयां तो जिया कोई गुनह ही बन जावा है।क्यों कोनी  बिकी गलतियां एक बेटी जिया ही नजरअंदाज कर दी जाव । जी दिन  बहू री गलतियां न बेटि जिया प्यार सु सुधरी जावेगी , समझवी जावेगी ,बीक दर्द सु घर क सदस्य न तकलीफ हुअगी और एक बहु भी बेटी सु प्यार  और सम्मान परिवार न देवगी तो  ही संभव हो  पवगो पुरुष प्रधान समाज में नारी रो सम्मान। आपरा बुलंद हौसला और परिवार र साथ सु ही  हर नारी आगे बढ़ निखर पाव  है ।परिवार रो साथ ही सबसु बड़ी ताकत भी हूंव है जठ जीवन की लाराई हारकर भी   बेक साथ सु जीत ही महसूस हुआ है।
  नहीं जाना घर  री बहु हो चाहे बेटी खराब तो एक नारी ही काहलाव है। जी दिन जलन और द्वेष री भावना  त्याग  ,  देवगी एक नारी  दुजी नारी रो साथ तो निश्चीत ही संभव हो जासी समाज म   नारी सशक्तिकरण र विकास ।
अगर एक नर  शिक्षित हुआ तो केवल  बीको  भविष्य ही विकसित हुआ है, लेकिन अगर एक नारी शिक्षित हुआ है तो पूरो कुटंब समाज राष्ट्रीय ही नहीं  पूरो देश  भी विकसित हुआ है।
अगर आप  एक पुरुष हो तो करी जो नारी री सम्मान और अगर आप एक स्त्री हो तो करी जो बिम सु  एक होने रो अभिमान। धन्यवाद

Manisha Maru.