हमारे जीवन का सुंदर सूर्योदय तभी होता हैं।
जब हम हर कदम हार कर भी,
फिर से उम्मीदों की नई किरणों के साथ,
हौसलों को बुलंद कर,
जीवन की नई शुरुआत कर लेते हैं।जब हम टूट कर हार जाते हैं
निराशावादी बनकर….
उस वक्त केवल धुंध का वातावरण ही
हमें चारों ओर नजर आता है।
लेकिन जब हम टूट कर हार जाते हैं
निराशावादी बनकर….
उस वक्त केवल धुंध का वातावरण ही
हमें चारों ओर नजर आता है।
फिर हमें न ताजे खिले गुलाबो की सुगंध
अच्छी लगती हैं।
ना ही हमारे स्वाद पर ताजी पीसी हुई कॉफी
का ही कुछ असर होता है।
©®मनीषा मारू
नेपाल














