काश कि ना समझी मे ही, बीत जाता सारा जीवन
भीगता रहता बारिश की हर बूंदों से, फिर आज भी ये अंतर्मन।
छतरी चाहे खुली हो या बंद,
नजरें चाहती वही ,पहली रिमझिम फुहारों वाला आनंद।
लेकिन अब घनघोर घटाएं जब भी छाए,
यूं लगता है जैसे आनंद और टीस,
दोनों संग संग लेकर आए ,
और खुले नयनों के रास्ते होकर हौले से बह जाए।
महीना: अगस्त 2020
तुलना क्यों?
अपनी तुलना भला किसी से हम क्यों करें?
सूर्य – चंद्रमा हर दिन दोनों ही चमकते हैं,
अपना-अपना वक्त आने पे।
नेपाल ,भारत मैत्री

कितनी बड़ी है धरती मां हमारी ,
और कितनी छोटे हैं हम।
फिर क्यों ना हम ऐसा बीज बोए ,
नाम ले भारत का और नेपाल हर्षित होए।
भारत के चमन में भी हम ऐसे फूल खिलाए
फूल खिले हो वहां, और खुशबू
हमारे गुलशन तक आ जाए।
हर क्षेत्र में आगे हैं ,हमारा भारत देश ,
फिर भी देखो क्यों तन-मन-धन लगाकर
भटक रहे हम भी विदेश।
हृदय खोल, हाथ जोड़, अगर करें हम एक दूसरे का सम्मान,
तभी बन सकेगा भारत और नेपाल एक दूसरे का अभिमान।
तीन दिशाओं से हैं हम आपस में जुड़े,
फिर बनके ताकतवर क्यों ना हम एक दूसरे की रक्षा करें।
मानो जैसे कोई द्वारपाल की तरह ,आपस में बातें कर रहै हो होकर खड़े।
मिलते जुलते हैं हिंदू राष्ट्र हमारे, धर्म स्थानों की हैं दोनों ही देशों में भरमार।
चाहे हो वो “तिरुपति बालाजी” हो चाहै “पशुपतिनाथ”
फिर क्यों ? बढ़ाकर जाती भेदभाव खुद को ही तोड़ रहे हैं !
और कर रहे हैं आपस में संबंध विच्छेद।?
बनाए हम भारत और नेपाल के इतने मजबूत संबंध–
कि रिश्तो की भाषा में कहा जाता है, जैसे जनम -जनम का है यह बंधन।
दोनों ही हो अगर देश के लिए कुर्बान “मां ममता को” और “जान को जवान”
तभी हम कह सकते हैं “मेरा भारत महान”और हम “नेपाल वासियों” को को प्यारा है “हिंदुस्तान”।
बना रहे दोनों ही देशों के बीच ,आपसी प्यार और उदगार
फिर तो “नेपाल -भारत मैत्री “की मेरी यह कविता बन जाए आने वाले हर सालों के लिए यादगार।
