काश कि ना समझी मे ही, बीत जाता सारा जीवन
भीगता रहता बारिश की हर बूंदों से, फिर आज भी ये अंतर्मन।
छतरी चाहे खुली हो या बंद,
नजरें चाहती वही ,पहली रिमझिम फुहारों वाला आनंद।
लेकिन अब घनघोर घटाएं जब भी छाए,
यूं लगता है जैसे आनंद और टीस,
दोनों संग संग लेकर आए ,
और खुले नयनों के रास्ते होकर हौले से बह जाए।
दिन: अगस्त 29, 2020
तुलना क्यों?
अपनी तुलना भला किसी से हम क्यों करें?
सूर्य – चंद्रमा हर दिन दोनों ही चमकते हैं,
अपना-अपना वक्त आने पे।
