अफवाहों की नगरी कड़क चाय सी हैं होती।
पहले तो अदरक सी बातों को कूट कूट कर
खूब उबाला जाता।
फिर इधर उधर सबके कानों तक पहुंचा,
उसपर चायपत्ती सा रंग हैं चढ़ाया जाता।
कभी झूठी बातों का गर्म मसाला
हद से ज्यादा डाल,
खूब गर्म गर्म हैं परोसा जाता।
तो कभी ज्यादा चीनी सा मीठा बना,
अंतरमन घायल हो जाए
ऐसा रोग भी हैं लगाया जाता।
कोई अफवाह हैं फैलता,
तो कोई अपने को बेगुनाह साबित करने में,
ताउम्र खुद को दाऊ पर लगा,
दुनिया से रुखसत भी हैं हो जाता।
लोगों को उबाल लेने का
तबतक बड़ा मजा है आता,
जबतक वो उफान उल्ट कर
उनके गले का दर्द ना बनजाता।
अफवाह तो अफवाह ही होती है,
चाहें अपने उड़ाए या गैरो से उड़ती जाए।
उसवक्त मजबूती से हौसला रख,
हर उड़ती अफवाहों को सोचना बंद कर ।
खुद से बस इतना ही काहा जाए,
ए_जिंदगी तुम बड़ी खूबसूरत हो….
बस जी भर के लिए तुझे जी लिया जाए..
बस जी भर के लिए तुझे जी लिया जाए।
©®मनीषा मारू
नेपाल

