सुनहरा भोर

अंधकार से तूफान जब घिरा हो चारों ओर,
दिखाई देती है अगर प्रकाश की एक सूक्ष्म डोर,
देखकर उस डोर को,
अपने हौसले को कर फिर से जीवांत
और जगा ले अंतर्मन में एक नई विश्वास की भोर।

आया है जो भुखमरी ,लाचारी, बेबसी का दौर,
कुछ ना सही, फरियाद तो कर सकते हैं रब से,
हम एक दूजे के लिए दोनों कर को जोड़।

इस संकट की काली घटा को दूर हटाओ ,
प्रार्थना हमारी स्वीकार करो,
घर से हुए है जो बेघर ,
दे दो उनको कोई तो ठोर,
अब तो सुन करुण पुकार हमारी,
कर दो अंधेरी रात का हैं ईश्वर, सुनहरा सा भोर।

मनीषा मारू
नेपाल