“मां”❤️ के बिना हर कहानी अधूरी।
हरहाल में करती वो, तो अपने बच्चों की इच्छा पूरी।
एक बार जे झिरक देती “मां”❤️ अगर,
फिर बार बार ह्रदय से लगा
करती पल पल स्नेह आलिंकन।
“मां”❤️ शब्द तो होता अपने आप में ही पावन।
उसके बिना लगता हरपल सुना सावन।
हर “मां”❤️ को अपने बच्चे लगते जिगर के टुकड़े,
गोरे हो या काले,सुधरे हो या बिगड़े,
ले ले बलैया “मां”❤️ तो बस हरपल नजर उतारे।
“मां”❤️ के नाम पे कई लेखनी का लेख है गढ़ता,
उनके आगे तो देवताओं का सर भी जाता हे झुकता।
मेरी लेखनी भी जब झुक– झुक कर लिखती है “मां”❤️ का नाम,
यूं लगता है उस वक्त मुझको, जैसे हो गए हो मेरे चारोधाम।🙏❤️🙏

