मां तुमसा धैर्य कहां रख पाते हैं।

मां तुमसा धैर्य कहां रख पाते हैं।
जरा सी परेशानी आई नहीं कि
उदास हताश हम हो जाते हैं।
मां तुमसा धैर्य कहां रख पाते हैं।

मां तुम तो केवल तुम ही हो,
हर मुश्किलों का सामना कर
बड़े नाजो से पाला हमको.
जब बारी आई हमारी ,
बच्चों को पालने की,
तुमसा धीरज नहीं धारा जाता मां
बेबाक ही झल्ला उठते हैं,
मां तुमसा धैर्य कहां रख पाते हैं।

बड़ी से बड़ी तकलीफ में भी,
अकेले ही दर्द उठा लेती
और चेहरे पर अपने
एक शिकन ना आने देती।
लेकिन हम तो मां
छोटी-छोटी कोशिशों में भी हार जाते हैं।
मां तुमसा धैर्य कहां रख पाते हैं।

लेकिन यह भी कड़वा सच है मां
बस तुम्हारी ही बातें
तुम्हारी ही छवि सोच ,
दिनभर में एक बार
जरूर चार्ज हम हो जाते हैं।
मांतुमसा धैर्य हम कहां रख पाते हैं।

मनीषा मारू
नेपाल